Kavita – Hamesha Der kar deta hu main

हमेशा देर कर देता हूँ मैं
ज़रूरी बात कहनी हो
कोई वादा निभाना हो
उसे आवाज़ देनी हो
उसे वापस बुलाना हो
हमेशा देर कर देता हूँ मैं
मदद करनी हो उसकी
यार का धाढ़स बंधाना हो
बहुत देरीना[1] रास्तों पर
किसी से मिलने जाना हो
हमेशा देर कर देता हूँ मैं
बदलते मौसमों की सैर में
दिल को लगाना हो
किसी को याद रखना हो
किसी को भूल जाना हो
हमेशा देर कर देता हूँ मैं
किसी को मौत से पहले
किसी ग़म से बचाना हो
हक़ीक़त और थी कुछ
उस को जा के ये बताना हो
हमेशा देर कर देता हूँ मैं
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Hindi Poetry

Tum meri baate samajh paogi kaise, mai JAZBAAT likhta hu aur tum ALFAAZ padhte ho !!
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मोहब्बत और मौत की पसंद तो देखो ,
एक को दिल चाहिए और दूसरे को धड़कन
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“कामयाब लोग ” अपने फेसले ” से दुनिया बदल देते हे
!! और
नाकामयाब लोग दुनिया के डर से “अपने फेसले ” बदल लेते हे !!”
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